मीडिया – मिसइन्फोरमेशन दिया

मीडिया – मिसइन्फोरमेशन दिया कल से आज का मीडिया कैसे इतना बदल गया, कब बिकने लगा पत्रकार शब्दकोख के दोस्त लेखक विश्वेश तिवारी जी के सवाल आप सभी

काबिल हूँ

मैं काबिल हूँ शब्दकोख से मिला 14 वर्ष का काबिल इंसान जो बन सकता हैं आपके लिए प्रेरणा जिसकों देख उसके संघर्ष भरे जीवन का अंदाज़ा लगा पाना आसान नहीं

पहले उससे मेरी काफी बातें होती थी

पहले उससे मेरी काफी बातें होती थी।अपनी हर तकलीफें मुझसे बताती थी।उसकी फैमिली का एक हिस्सा बन चुका था।उसके देर रात जगने की वजह बन चुका था।आज भी वो जगती है रात भर, पर मेरे लिए नहीं।

अब मैं खुद से थक चुका हूँ पापा

ये शहर अब मुझे रास नही आ रहा हैतेरा बेटा तेरे पास आ रहा है, पापा अब मैं खुद से थक चुका हूं पापा।इस दिखावे की दुनिया सेपरत दर परत वाले इन खूबसूरत चेहरों से।अब मैंने सिसकियां लेना भी छोड़ दिया है।हां मैंने सोचना भी कम कर दिया है लेकिन मैं आज भी सोचता हूं आपकी खुशियों के बारे मेंमम्मी […]

अब कभी लौटकर न आऊंगा

सुनोबहुत थक सी चुकी थी न तुम मेरे हर सवालों से?प्यार, वक़्त की भीख मांगता था।तुम्हें पाने के लिए तुमसे ही लड़ा करता था।पर ठहर सा चुका हूं तुम्हें पाने की जिद्द मेंअब लाख रोऊंगा, खुद को मनाऊंगा लेकिन तुम्हारे सामने नहीं गिड़गिड़ाऊंगा,बन गई थी तुम मेरी कमजोरी, अब मैं उसी को अपनी ताकत बनाऊंगाबिखकरकर कैसे समेटते हैं ख़ुद को […]

अब की फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना

चुपके चुपके पीछे से आकर सीने से लेना, अब की फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।रंगों में रंगे साथ बैठकर शाम गुजार देना, अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देन