आँखों देखी
काबिल हूँ

काबिल हूँ

मैं काबिल हूँ; काबिल होने किसी कार्य को अपने दम पर अंजाम तक पहुंचना कार्य की सभी पराकाष्ठाओं पर खरे उतरना हमारी काबिलियत को दर्शाता हैं। आज मैं एक ऐसे ही शख्स से मिला जिसका काबिल होना मेरे लिए बेहद ही प्रभावित रहा, वह महज़ चॉकलेट, टॉफी और बुढ़िया के बाल से आकर्षित हो जाने वाली उम्र का है। वो हाफ पेंट पहनने वाला 14 वर्ष का लड़का हैं, जिसकी सोच और सामाजिकता आपको मोह लेगी

हमारे जीवन में अक्सर कुछ ऐसे लोग होते है जो अपनी नज़रों में हमारे लिए हमेशा सम्मान की भावना रखते हैं।

उसका और हमारा रिश्ता भी कुछ ऐसा ही हैं, उसके परिवार में उसकी माँ जो एक लकड़ी के पुराने पलंग पर रख कर महिलाओं और पुरुष के अंडरगार्मेंट्स बेचने वाली महिला जिसकी सिर्फ एक समाजिक आदत गुटका खाना उसके पिता एक रिक्शा चालक है।

जिनकी समाजिक आदत शराब का सेवन करना जिसने उन्हें अपनी बीवी से अलग रहने पर मजबूर कर दिया और एक छोटी बहन जिसको गाने का बहुत शौक हैं। इन सभी से जुड़ा हुआ वो जो अपनी हलकी तोतली आवाज़ टूटे हुए दांत और मन को मोह लेने वाली मुस्कान से सभी का दिल जीत लेने वाली छवि रखता हैं,

आज कुछ परेशान सा था वो मेरे पास ठंडा पानी पीने आता रहता हैं, आज उसकी गुमसुम आवाज़ ने मुझे उसके हाल के बारे में पूछने पर मजबूर किया मैंने उससे पूछा क्या हुआ बहुत शांत हो उसने बोला मां की तबियत खराब है, कोरोना का माहौल है कल एक डॉक्टर के यहां से दवा लायी है दो दिन से बिस्तर पर हैं।

वो अपनी दुकान महज़ 8 वर्ष की उम्र से संभाल रहा हैं; मैंने पूछा की खाना कौन बनता है? उसने कहा की बहन पापा के पास हैं, अभी तो हम खुद बना लेते है नहीं तो अंडा ब्रेड खा लेते हैं।

मैंने पूछा- कुछ खाओगे

वो बोला- नहीं अभी खाना खा कर उठे हैं, अब दुकान देखने जा रहे

मैंने कहा- माँ की दवाई के लिए कुछ पैसे लेलों

वो बोला- नहीं

मैंने जबरदस्ती की

उसने कहा एक तो ये कोरोना आ गया है, उप्पर से रात 8 बजे से दुकान बंद करना शुरू करो तो 9 बजे तक घर पहुंच पाओ मैंने कहा अपना ध्यान रखा करो और मम्मी का भी तो वो 14 वर्ष का लड़का मुझसे बोला कोई दिकक्त नहीं है अब मैं काबिल हूँ।

इतना कह कर वो काबिल व्यक्ति कूदता हुआ अपनी दुकान की ओर चला गया।

हैप्पी दिवाली

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