शब्द संग्रहालय
वापस नहीं आएगी आयशा

वापस नहीं आएगी आयशा

खुद से हार कर अपने प्यार को पाने को चाहत इंसान को तोड़कर रख देता है।
पेट में ही बच्चा मर जाए, ब्लीडिंग हो, डिप्रेशन में चली जाए, सबकुछ समेटने में आयशा बिखर जाए।

हर पल एक नई तकलीफ से गुजरती रही लड़की चुपचाप रही, बस इस ख्याल से कि मां बाप की इज़्ज़त पर आंच न आए। शायद बहुत टूट चुकी थी वो अंदर से।
मर तो गई थी वो उसी रोज़ जब उसके पेट में पल रहा बच्चा कोख़ में ही दम तोड़ गया और उसे सम्भालने वाला कोई नहीं था।

सांसे चल रही थी उसकी बस इस आस में कि शायद “कल” सब कुछ सही हो जाए, लेकिन ये “कल” कभी आता कहां है। जाते जाते उसने खुदा से इंसान की शक्ल से न मिलवाने की गुज़ारिश की, क्योंकि यहां इंसान नहीं उसकी शक्ल में हैवान घूम रहा है। पैसे और हवस की लालच में किसी की जिंदगी का खिलवाड़ बनाना बेहद आसान है। भूल जाता है इंसान कि उसकी जिंदगी का मकसद क्या है!
ये आयशा वापस नहीं आएगी, लेकिन दूसरी आयशा फिर खुद से हारेगी, आरिफ को अफसोस नहीं होगा।

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