शब्द संग्रहालय
यादों का गांव

यादों का गांव

गांव जिसको बोलते या सुनते ही हज़ारो यादों का झोका एक पल में हमे अपने कब्जे में कर लेता है, पीपल की छांव कच्ची कभी खत्म न होने वाली सड़क, ट्यूबवेल का पानी, नानी-दादी की कहानी ठंड की राते चिल्लम सुलगाते किस्से कहानिया कुछ अपनी सुनाते कुछ सुनते रह जाते गांव का हर घर अपना लगता हवाई जहाज में घूमना बस एक सपना लगता

किसी के बचपन का गांव किसी के बुढ़ापे का गांव कभी बहुत कुछ सिखाने वाला गांव तो कभी हज़ारो तज़ुर्बे के खजाने का गांव धोती, पगड़ी, दुप्पटे का गांव बूट चना, मोंगफली, सखियों सहेलियों का गांव इकतारा, लोक गीत, गाली नौटंकी, खेला का गांव माड़ की चिकचिक पन्चो की झिकझिक का गांव एक हमारा गांव की यादों को छोड़कर शहर जाने वालो का गांव, एक शहर छोड़कर गांव लौटने वालो का गांव

दोनो वाक्यो में दूसरा कम ही देखने और सुनने को मिलता है, पर हम कितनी भी कामयाबी हासिल कर ले कहि न कही दिल और मन से गांव से जुड़े रहते है जो बेहद जरूरी भी है।

गांव से हम बहुत कुछ ले लेते है पर अपने गांव को कभी कुछ दे नही पाते क्योंकि गांव को उसकी जरूरत नही होती गांव हम सबको बनाता है, हम और आप गांव नही बना सकते क्योंकि हमें शहर बनाना रहता है, पैसा कमाना शहर बनाना शहरी बन जाता रहता है। पर मेरे दोस्त गांव जितना हमारा रहता है, शहर उतना ही अनजाना रहता है…. शहर उतना ही अनजाना रहता है…

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