पोटली भर इश्क़
अब मैं खुद से थक चुका हूँ पापा

अब मैं खुद से थक चुका हूँ पापा

ये शहर अब मुझे रास नही आ रहा है
तेरा बेटा तेरे पास आ रहा है, पापा

अब मैं खुद से थक चुका हूं पापा।
इस दिखावे की दुनिया से
परत दर परत वाले इन खूबसूरत चेहरों से।
अब मैंने सिसकियां लेना भी छोड़ दिया है।
हां मैंने सोचना भी कम कर दिया है

लेकिन मैं आज भी सोचता हूं आपकी खुशियों के बारे में
मम्मी को होने वाले दिल के सुकून के बारे में।
आपके मन में उठ रहे उन सारे सवालों के बारे में
जो आपसे हर दफा ये कहती है कि आगे सब कुछ कैसे होगा?

मुझे पता है आपकी आंखों का चश्मा टूट चुका होगा
उस चेक वाली शर्ट का कॉलर भी फट चुका होगा।
मम्मी के पैरों के पायल भी अब घिस चुके होंगे
और वो दीदी की शादी में मम्मी के लिए ली गयी साड़ी भी तो काफी पुरानी हो चुकी होगी न।

मुझे पता है मेरे इन सारे सवालों को नजरअंदाज करोगे
अपनी सारी तकलीफों को मुझसे छुपाओगे
देर तलक घर लौटने की वजह भी नहीं बताओगे
और उस रात किस बात पर आप दोनों कमरे में बैठ के रोये थे ये बात भी हमसे छुपाओगे।

आपकी आंखों में खुशी के आंसू लाने की इच्छा तो बहुत होती है पापा
पर यहां में खुद से हारता नजर आ रहा हूं।

हर सुबह इस उम्मीद से जगता हूँ, की आज से एक नई शुरुआत करूँगा।
भूल जाऊंगा सारे बीते हुए कल को, अपनी एक नई पहचान बनाऊंगा
आपके लिए वो सबकुछ करूँगा जो एक बेटे का फ़र्ज़ बनता है।
दीदी को वो लाल साड़ी बहुत पसन्द थी न, मैं वो भी दिलाऊंगा।
आने वाली होली में आपके लिए सफ़ेद कुर्ता सिलवाऊंगा।
पर इन सबके बीच मैं खुद से हारता नजर आ रहा हूं।
बहुत कुछ करने की ख्वाइश में कुछ भी नहीं कर पा रहा हूं
लेकिन इसमें मैं गलत नहीं हूं पापा।

सोचता हूं सबकुछ छोड़कर कुछ लम्हें गुजारूं आपके साथ
बैठूं आपके सिरहाने और बताऊं कि किन किन तकलीफों से गुजर रहा हूं में।
क्यों पूरी रात बीत जाने के बाद भोर में सो रहा हूं मैं
बताऊं कि क्यों खुद को अंदर ही अंदर कोस रहा हूं मैं।
नहीं सम्भाल पा रहा हूं खुद को
थोड़ा टूट सा चुका हूं पापा।
सच कहूँ तो अब खुद से थक चुका हूं पापा।

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