पिता

क्या हो आप?आपका मकसद क्या है?मैं खुद से सवाल किया करता हूँ क्यों आपने मुझे इतना प्यार दिया,धूप में रहकर मुझे छाँव दिया।कभी मेरी हर ख्वाइश को पूरा करने के लिए अपनी इच्छाओं को मार दिया,तो कभी मेरी जिद्द को पूरा करने के लिए खुद को अंधकार दिया।मेरी पलकों से आँसू की बूंदो को अलविदा करने के लिए आपने वो […]

करवाचौथ

मैं भी सजती हूं संवरती हूं,माथे सिन्दूर और हाथों में मेहंदी लगाकर,कहीं दूर से उन्हें निहारती हूं । कह गए थे वो इस बार एक जोड़ी सोने का कंगन लाऊंगा,छलनी से अपना दीदार करवाऊंगा।पर न जाने वो कहां हैं,बस एक आस लगाए बैठी रहती हूं,एक उम्मीद में ही शामें गुज़ार दिया करती हूं। इस बार भी मुझे उनका इंतज़ार है,सोने […]

अब गांव में पहले वाली बात नहीं

शायद आप सहमत न हों! बड़े अरसों बाद गांव आया था, वैसे कहने को गांव शब्द बड़ा अच्छा लगता है, पर पहले जैसी मिठास नहीं अब गांवों में।किताबों में खूब पढ़ने को मिलता है, गांव जन्नत हैपर वो जन्नत अब कोसों दूर जा चुकी है।भोर की खुशबू कहीं लुप्त हो गई है,छन के जो सूरज की किरणें आती थी जगाने […]

माहवारी

आज उसकी माहवारी का तीसरा दिन हैपैरों से चलने की ताकत नहीं हैबिस्तर से उठने की हिम्मत नहीं है।न रो सकती है, न इलाज के लिए जा सकती है,अपना ये दर्द वो किसी से बांट भी नहीं सकती है। कल जब वो दुकान से विष्पर पैड का नाम फुसफुसाई थी।बगल में खड़े कुछ मर्दों ने अपनी तिरछी नजरें उसपर गड़ाई […]