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भारत का गण – तंत्र

भारत का गण – तंत्र

भारत देश जो हमेशा से अपनी द्रव्यमान संस्कृति, इतिहास, धार्मिकता गण जैसी अमूल्य व अमिट शक्तियों एवं शख्सियत का भंडार माना जाता रहा हैं।

भारत का संविधान जिसमें हैं सभी भारतवासियों का विधान

भारत ने एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया। भारत का संविधान भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है जो एकता, समानता, न्याय, स्वतंत्रता और भातृत्व की भावना को प्रोत्साहित करते हुए करोड़ों भारतीयों की आशाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति का सशक्त माध्यम भी है। संविधान हमे मौलिक अधिकार और कर्तव्यों को उपयोग में लाने की आज़ादी देता हैं। जिससे एक समूह तंत्र का निर्माण भी होता हैं।

भारत का गण और तंत्र

भारत देश पिछले 72 सालों से गणतंत्र दिवस मना रहा हैं, यह भारत का एक राष्ट्रीय पर्व हैं जो हर वर्ष जनवरी की 26 तारीख को मनाया जाता है। सन 1950 में इसी दिन भारत सरकार अधिनियम (एक्ट 1935) को हटाकर भारत ने अपना संविधान लागू किया था। 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतान्त्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। 26 जनवरी भारत के तीन राष्ट्रीय अवकाश से एक हैं, बाकी दो स्वतंत्रता दिवस और गाँधी जयंती हैं।

गणतंत्र दिवस के दिन राजधानी दिल्ली के राजपथ पर भारत का शौर्य प्रदर्शन
स्कूल परेड

गणतंत्र दिवस के दिन राजधानी दिल्ली के राजपथ पर भारत का शौर्य प्रदर्शन, साहित्य, संस्कृति व अन्य प्रतिभाओं की शोभायात्रा सम्पूर्ण देश में व विश्व भर में लोकप्रियता का पात्र हैं। विद्यालयों में राष्ट्रगीतों, नाटकों के माध्यम से देश की वीरता को याद किया जाता हैं, हर घर तिरंगे और रंगोलियों से सुशोभित रहते हैं। रेडियो, टेलीविज़न के माध्यम से देश भक्ति के गीत व चलचित्र इस दिन की महत्वकांशा हर दिल में जगाने का काम करती हैं।

ध्वजारोहण से बाइक रैली, तिरंगा रैली तक

बदलते वक़्त के साथ बदलना हमारी चाहत हो सकती हैं, वक़्त हमेशा से सामान्य हैं। बढ़ते और बदलते वक़्त में हमे जो कुछ भी देखने को मिलता हैं वो समय के साथ आम होता जा रहा हैं, चाहे वो यातायात के नियमों को गुटखे जैसा मु में दबा के रखते वो भारत के नौजवान हाथ में तिरंगा और गाड़ियों के शोर से भी तेज आवाज़ में भारत माँ की जयकार लगाते और एक दूसरे के लिए माँ बहन से शुरू होने वाले अपशब्दों का प्रयोग बड़ी आसानी से करते हुए गणत्रंत दिवस के दिन देखे और घरों में बैठकर भी सुनने को मिल सकते हैं।

बदलते वक़्त के साथ बदलना हमारी चाहत हो सकती हैं, वक़्त हमेशा से सामान्य हैं।
बिना हेलमेट पहने देश की शान में निकले लोग

तिरंगा रैली में हम तमाम भंगिमाओं को निभाते हुए लोग अपनी सोशल मीडिया पर कई सरे अनजान व्यक्तियों से पसंद आ जाने के लिए कभी-कभी जान की बजी भी लगाने को तैयार हो जाते हैं। रैली के दौरान उनकी वेशभूषा को देखते हुए लगता हैं कि भारत में ऐसे भी देश भक्त हैं उसके बाद भी हमे इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा हैं।

किस स्तिथि में हैं लोकतंत्र के चार स्तम्भ
भारत का लोकतंत्र चार स्तम्भों पर टिकी हुई हैं।
लोकतंत्र के चार स्तम्भ

भारत का लोकतंत्र चार स्तम्भों पर टिकी हुई हैं। 1. विधायिका 2.कार्यपालिका 3.न्यायपालिका और 4. मीडिया जिससे यह आस लगाई जाती हैं की वो बाकी तीनों के कार्य पर अपनी पैनी निगरानी रखने का प्रयास करता रहेगा। जनहित की सूचनाये समय पर प्रसारित करने , लोक व्यवस्था निर्माण करने व समाज को एक सूत्र में बांधे रखने के आधार पर रख गया। परन्तु आज इस “कथित प्रगतिशील” समाज मे इसका नया स्वरूप बन चुका है जो आज हर एक व्यक्ति अपने विचार और ज्ञान के आधार पर बताने से नही चूकता है। आज हर दूसरा व्यक्ति चौथे स्तम्भ से गहरा ताल्लुक रखता हैं, देश के कई शहर मीडिया हब (यानि एक शहर जहां किसी प्रत्येक कार्य को करने वालों की संख्या ज्यादा हो) के नाम से से जाने जा रहे हैं।

आज का मीडिया हमे झूठी और सच्ची ख़बरों में फर्क देखना सीखा रहा हैं, तो दूसरी ओर हम कुछ ऐसे मीडिया के कर्मियों से मिलते हैं जिन्हें इसके बारे में सिर्फ इतना पता होता हैं कि अधिकारी, नेताओं और फ़िल्मी सितारों के साथ फोटो खींचने का इससे आसान तरीका नहीं हो सकता है। गौरतलब है कि भारत देश में आज इस तरह के लोग हर कार्य में शामिल हैं, चाहे उसका सम्बद्ध लोकतंत्र से या नहीं

गणतंत्र दिवस पर हमारे कर्तव्य

तेज़ी के साथ बढ़ते हुए जीवन में हमे अपने संस्कारों को आगे बढ़ाने का वक़्त रोज ही निकलना चाहिए लोकहित में हमे हर स्थान हर परिस्थिति में यह ध्यान रखना चाहिए की हमारा प्रभाव व हमारे कार्य का प्रभाव किसी भी तरह से ऐसा नहीं पड़ना चाहिए जो हमारे देश पर किसी भी तरह के सवाल पैदा करे

वसुधैव कुटुम्बकम् के देश में हमे इस धरती के फलते रहने की कामना करते हुए इसके प्रति अपने कर्तव्यों का ध्यान रखना हैं, हम सबकों साथ मिलकर देश को नयी उन्नतियों के शिखर पर साथ मिलकर पहुंचना हैं।

अंततः शब्दकोख की ओर से आप सभी पाठकों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

इतनी शक्ति मुझे दे ना दाता मन का विश्वास कमजोर हो ना

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