खुला पन्ना
फटी जीनस

फटी जीनस

फटी जीनस

अजी सुनती हो भाग्यवान ! शर्मा जी आए हैं जरा दुई कप चाय बनाई लाओ । ….अच्छा जी लाई अभी।

और बताओ भैया कैसन आना हुआ इधर इतने समय बाद; सब कुशल मंगल है ना।

शर्मा : सब ठीक ही है। ई महंगाई ने जान ले रखी है हम जैसे आम आदमियों की ऊपर से बिटिया भी शादी लायक हो रखी है। इस बरस उहकर बिया कराने का सोचत है। मगर जेब साथ न दे रहा है।

श्याम : भाई ई महंगाई ने तो जेब खाली करदी है ! हमार नेहा भी शादी लायक हो गई है मगर कहती है अभी आगे और पढ़ेगी । हम तो साफ कह डाले है जितना पढ़ना है पढ़ियो आराम से । दुनिया बदल रही है हम भी अब मॉडर्नवा होगए है बखत के साथ ।

शर्मा : बात तो तूने बहुत पते की है । आज कल लड़किया लोग बहुत आगे बढ़ रही है । खानदान का नाम ऊंचा कर रही है ।

श्याम: सही बोलत भाई । हम तो अपने दोनों बचवा लोग में अंतर नहीं समझते ।

मारे लिए दोनों बचवा बराबर है ।

(श्याम की पत्नी चाय लाते हुए)

श्याम की पत्नी: भाईसाहब नमस्ते ! शीला भाभी और बच्चे लोग ठीक है ना।

शर्मा: नमस्ते भाभीजी ! शीला की तबियत थोड़ी गड़बड़ चल रही है , बाकी बचवा लोग ठीक है।

(पीछे से किसी की आवाज आती है)

ओ श्याम भाई ! किधर हो।

श्याम: रमेशवा इधर आ इनसे मिलत। ई है शर्मा भाईसाहब हमार बचपन के दोस्त।

रमेश: राम राम शर्मा भैया।

शर्मा : राम राम भाई।

श्याम की पत्नी: रमेश भाई हम तुम्हार लिए चाय बनाई के लावत है।

श्याम : और बताओ रमेशवा धंधा पानी कैसा चल रहा।

रमेश : क्या बताऊं श्याम भैया बहुत मंदी चल रही है दुकान में।

शर्मा: सही बोलत हो भाई।

रमेश:अब कस्टमरवा लोग इंटरनेटवा से राशन मंगवा लेवत है। इस इंटरनेटवा ने पहले से ही औरत जात को बिगाड़ दिया था अब तो हमार जैसे छोटे दुकानदार लोग के पेट पर लात मार दिया है।

श्याम : इंटरनेटवा के फायदे भी तो है। अब कल ही हमार नेहा ने हमको मोबाइल पर समाचार पढ़ना सिखायित है।

रमेश : समाचार से याद आया। तुम सभो ने वो समाचार सुना जिसमें कोई नेतवा बोलत है कि लड़किया लोग का फईसन में फटी हुई जीनस पहनना गलत है और ऐसी औरतें अपने बचवा लोग को गलत संस्कार देयेंगी। अब बताओ भाई लोग क्या गलत बोला नेतवा। उसके इस बयानवा पर खूब बवाल चल रहा है।

शर्मा : हां भाई रमेशवा हमने देखा था कल इसको टीवी पर। अब बताओ फटी हुई आधी तिरछी जीनस पहना अच्छा लगता है क्या लड़किया लोग को। अपन इज्जत अपन हाथ में होवत है।

श्याम : हां भाई लोग ! लड़किया लोग को सलवार कमीज ही पहनना चाहिए। पूरा तन ढका रहेगा तो इज्जत बची रेहवत है। अब आधी कटी फटी जीनस पहनत है फिर कोई छेड़ दे या ऊंच नीच हो जाए तो कहेंगी हमारी कोई गलती नही थी।

शर्मा: सही बोलत हो भाई श्याम तुम।

(नेहा चाय लेकर आती है )

नेहा : नमस्ते शर्मा अंकल। नमस्ते रमेश अंकल।

शर्मा : खुश रहो बिटिया। कितनी बड़ी हो गई है बिटिया। पीछली बार जब देखत था तो छोटी से थी।

श्याम : हां बिटिया कब बड़ी हो जावत पता ही न चलत है।

(नेहा चाय रख कर चली जाती है)

रमेश : नेहा बिटिया तो शादी लायक हो गई है। मारी नजर में 1 – 2 अच्छे लड़के है। तुम बोलो तो बात चलाए।

श्याम: ना रमेशवा अभी हमारी बिटिया आगे पढ़ना चाहवत है। शादी का क्या है एक न एक दिन तो करना है। अभी जितना मन है बिटिया पढ़ लेगी। शादी बाद तो घर ही संभालना है उसको।

बाकी हम लड़का लड़की में फर्क न करत है क्योंकि हमार लिए दोनों बचवा बराबर है….!!!

संभोग

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