अब कभी लौटकर न आऊंगा

सुनोबहुत थक सी चुकी थी न तुम मेरे हर सवालों से?प्यार, वक़्त की भीख मांगता था।तुम्हें पाने के लिए तुमसे ही लड़ा करता था।पर ठहर सा चुका हूं तुम्हें पाने की जिद्द मेंअब लाख रोऊंगा, खुद को मनाऊंगा लेकिन तुम्हारे सामने नहीं गिड़गिड़ाऊंगा,बन गई थी तुम मेरी कमजोरी, अब मैं उसी को अपनी ताकत बनाऊंगाबिखकरकर कैसे समेटते हैं ख़ुद को […]

वापस नहीं आएगी आयशा

खुद से हार कर अपने प्यार को पाने को चाहत इंसान को तोड़कर रख देता है।पेट में ही बच्चा मर जाए, ब्लीडिंग हो, डिप्रेशन में चली जाए, सबकुछ समेटने में आयशा बिखर जाए। हर पल एक नई तकलीफ से गुजरती रही लड़की चुपचाप रही, बस इस ख्याल से कि मां बाप की इज़्ज़त पर आंच न आए। शायद बहुत टूट […]

गुलाब डे

मैं चाहता हूँ आज तुमको मैं भी उन सबकी तरह गुलाब दू रातों में जागते हुए देखे ख्वाब को आज़ाद करूँ अपने प्रेमी और प्रेमिकाओं को गुलाब के साथ दे यह

क्या तुम्हें कविता सुनाता है वो?

क्या आज मैं वो लिख दु जो कभी पढ़ा नही तुमने मैंने उम्र भर नज़्म-नज़्म जोड़कर एक कविता बनाई थी। जो सुनी नही तुमने मैं जानता हूं मेरी कविता से प्यार नही तुमको पर नफरत उतनी भी नही कर पायी थी।सुन तो लेती थी पहले तुम, क्या? अब किसी और को सुनने की बारी आई थी। क्या वो तुम्हे मेरी […]