पल दो पल का शायर
अब की फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना

अब की फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना

अब की फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना

चुपके चुपके पीछे से आकर सीने से लेना, अब की फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

रंगों में रंगे साथ बैठकर शाम गुजार देना, अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

चेहरे पर चढ़ के दिल में पक्का कर जाए कोई ऐसा रस मिला देना,

अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

कैलाश से काशी तक सारी दूरियां मिटा देना, अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

दुनिया जहां से पराये हो जाए तेरे रंग में मैं श्याम मेरे रंग में तू राधा हो जाए,

ऐसा समा बना देना, अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

गुझिया की मिठास को चख कर बढ़ा देना, अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

द्वेष, मोह, भाव, भेद अग्नि में जला देना, अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

सांसारिक सुखों से परे कर जोगी अपना बना लेना, अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

तुम्हारे बिना हुई हर बात को कहता समझ कर भुला देना, अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

ऊच नीच और रंगों के आधार पर अलग कर देने वालों से विदा लेना, अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

राम सा श्वेत सीता सा स्वाभिमान जगा देना, अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

यम सा अनुशासित शनि सा न्याय सीखा देना, अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

गुणों को मेरे समाज हित में गुणकारी बना देना अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

सब कुछ ध्यान से याद रखना कहीं भुला न देना और याद से अबकी फागुन कुछ ऐसे रंग लगा देना।

होली हैं!

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